पैसा 💸💸

पैसा

एक पल को ईमान किसी का भी मचल जाए 
जब बात पैसे की हो कि हो जाए
लोग कहते है कि संघर्ष सपनो को पंख लगाता है
मगर वो संघर्ष भी शर्मसार हो जाता है
जहां सपने महंगे भाव में बिक जाए 
जब बात पैसे की हो कि हो जाए

बदलते मौसम का लुफ्त उठाने का जी मेरा भी करता है,
ख्वाहिशो की झोली को भरने का जी मेरा भी करता है,
मगर ये मन का रोगी मंहगे ईलाज सोचकर बीमार होने से डर जाए ,
जब बात पैसे की हो कि हो जाए

ये मेहनत को भी आंकड़ो में तोल देता है
वो शख्स जिसके सिर के केश न रहे, रौशनी भरे वो नेत्र न रहे, 
दिन भर की थकान के बाद भी उसकी नींद ओझल सी हो जाए 
जब बात पैसे की हो कि हो जाए

इस पैसे की औकात तो देखो इसने खून के रिश्तों में भी मार करा डाली
बिताया था जिस आँगन में बचपन उसमें भी दरार कर डाली 
लड़ सकते थे पूरी दुनिया से जिसकी खातिर वो भी दुश्मन सा लग जाए 
जब बात पैसे की हो कि हो जाए 

डूबा देती है ये काग़ज़ की कश्ती
सवार होती जब इसपर लालच भरी हस्ती 
कमा कितना भी लो मगर सुकून कहा से लाओगे,घर तो बन जाएगा मगर घरवाले कहा से लाओगे
ठहर जाओ कहीं मुक्कमल 'अति का अंत' ना हो जाए 
जब बात पैसे की हो कि हो जाए

एक पल को ईमान किसी का भी मचल जाए 
जब बात पैसे की हो कि हो जाए...

~ लक्षिता उपाध्याय 




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