In the memory of my beloved ♥ daddy

मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है...

मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है,
इस गम भरे आलम से दम घुटता है।
घर का मेरे वो सरताज न रहा,
जीनें का अब वो अंदाज न रहा,
पकवानों से तो जैसे आनंद चला गया,
मेरे हर त्योहार से उमंग चला गया,
हँसी के ठहाके न रहें,
खुश रहने के बहाने न रहें,
इस बेबस हुई गृहस्ती को देख संताप रहता है,
मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है,
इस गम भरे आलम से दम घुटता है।


बहुत ख्वाहिशें थीं जो अधूरी रह गयीं,
बहुत बातें थीं जो अनसुनी रह गयीं,
मेरे किये की सराहना करने वाला वो शख्स न रहा,
भविष्य कैसा होगा यह सोचने का कोई लक्ष्य न रहा,
उस घटना को यादकर हृदय काँप जाता है,
खो न दूँ अब किसी को यही खौफ रहता है,
मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है,
इस गम भरे आलम से दम घुटता है।

~लक्षिता उपाध्याय 


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