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In the memory of my beloved ♥ daddy

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मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है... मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है, इस गम भरे आलम से दम घुटता है। घर का मेरे वो सरताज न रहा, जीनें का अब वो अंदाज न रहा, पकवानों से तो जैसे आनंद चला गया, मेरे हर त्योहार से उमंग चला गया, हँसी के ठहाके न रहें, खुश रहने के बहाने न रहें, इस बेबस हुई गृहस्ती को देख संताप रहता है, मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है, इस गम भरे आलम से दम घुटता है। बहुत ख्वाहिशें थीं जो अधूरी रह गयीं, बहुत बातें थीं जो अनसुनी रह गयीं, मेरे किये की सराहना करने वाला वो शख्स न रहा, भविष्य कैसा होगा यह सोचने का कोई लक्ष्य न रहा, उस घटना को यादकर हृदय काँप जाता है, खो न दूँ अब किसी को यही खौफ रहता है, मुझे अपनों को खोनें का डर रहता है, इस गम भरे आलम से दम घुटता है। ~लक्षिता उपाध्याय 

अतीत...

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अतीत आज फिर मेरा अतीत मेरे सामनें आया है, मेरी दुखद स्मृतियों को अपनें संग लाया है। तुमनें तो कहा था मैं सबक बनकर आया हूँ, तुम्हें आज से सिखाकर तुम्हारा कल बनाने आया हूँ, मगर कल की कल्पना मैं करूँ तो कैसे करूँ, जब तुमनें रात में मुझे सुबह के होने से डराया है, आज फिर मेरा अतीत मेरे सामनें आया है, मेरी दुखद स्मृतियों को अपनें संग लाया है। मैनें होश में भुलाया तो तुमनें ख्वाब में सताया है, मेरे कष्ट को तुमनें सदा ही बढ़ाया है, मेरी मासूमियत को तुमने अपनी हैरत से ललकारा है, अपनी फितरत से मुझे तुमने बेशक ही वाकिफ कराया है, आज फिर मेरा अतीत मेरे सामनें आया है, मेरी दुखद स्मृतियों को अपनें संग लाया हैं। ~लक्षिता उपाध्याय