Posts

Showing posts from February, 2022

Leaving home 🏡 and going for my College👩‍🎓

बिछड़ना जरूरी नहीं, मजबूरी है। आँखों में कुछ सपनें है, उन सपनों से जुड़े मेरे अपनें है,  मन में घबराहट है, दूर हो जाने की आहट है, अब तो बस यादों की हमजोली है, मैं भी क्या करूँ? बिछड़ना जरूरी नहीं, मजबूरी है। जानें की प्रसन्नता भी है फाँसले बढ़ जाने की चिन्ता भी है, माँ की फरियाद, भाई जैसी ढ़ाल और पिता की हर पल याद, ये सभी मेरी कमजोरी है, मैं भी क्या करूँ? बिछड़ना जरूरी नहीं, मजबूरी है। माँ कहती है, घर काँटने दौड़ता है, ये सूनापन ह्रदय कचोटता है, पूरा दिन सजदे में रहता है, एक झलक पाने को मन तरसता है, फुर्सत की चाह तो मेरी भी मर्जी है, मैं भी क्या करूँ? बिछड़ना जरूरी नहीं, मजबूरी है। ~ लक्षिता उपाध्याय 

मैं नास्तिक ही सही

मैं नास्तिक ही सही। आस्था रखने से ही काम बनते, तो तीर्थ स्थल पर मृतक न मिलते, दक्षिणा देने से ही पुण्य मिलता, तो पंडितो का धंधा कैसे चलता, यदि घर-घर लक्ष्मी का सम्मान होता, तो पुत्री होने पर कभी अवसाद न होता, तुम कहते हो खुदा बेहद अजीज होता है, मैं कहती हूँ वो छीन लेता है, जो हमारे अत्यंत करीब होता है, नशा करने से शिव का कुछ न बिगड़ेगा, तुम करके देखो तुम्हारा सब कुछ उजड़ेगा, तुम कहते हो ईश्वर सबको पार लगाता हैं, मैं कहती हूँ मझधार में फंसकर तो देखो, कौन बचाने आता है? तुम कहते हो तुमने कन्या को देवी बनते देखा है, मैं कहती हूँ, मैनें उसी कन्या से उसका बचपन छिनते देखा है, महाभारत में तुमने अर्जुन का रण देखा, पर मैनें तो कर्ण के संग कृष्ण का किया क्षल देखा, द्रौपदी की रक्षा का कवच जिसनें (कृष्ण ने) बनाया, तुम ही बताओ क्या वो कभी तुम्हारी (स्त्री की) रक्षा को आया? हाँ, मैं मंदिरो में शीश नहीं झुकाती हूँ, क्योंकि भक्तों की कतार में दरिदों को पाती हूँ, तुम कहोगे कि ये प्रभु की माया है, मेरा मन प्रार्थना में कभी नहीं लग पाया है, बिना वास्तविकता मैं मान जाऊँ ये मुनासिब ही नहीं, इन आस्तिकों की भ...

Expressing tiredness 😤 on weekend 😇

Image
चाय तो बनती है। ☕ बहुत देर हो गयी, सुबह से शाम हो गयी, भरपूर थकान हो गयी, संवारी थी जो शख्सियत वो आम हो गयी, खुशबू से ही मैं बाग-बाग हो गयी, अब चाय तो बनती है। फ्लेवर में मिल जाए अदरक, मिट जाए जिससे सारा सिरदर्द, मिलावट में भले ही थोड़ा पानी हो, 'तलप' लगने पर ना मिले तो परेशानी हो, बिन कहे ही मिल जाए तो वाहवाही हो, अब चाय तो बनती है। ~ लक्षिता उपाध्याय