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अतीत...

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अतीत आज फिर मेरा अतीत मेरे सामनें आया है, मेरी दुखद स्मृतियों को अपनें संग लाया है। तुमनें तो कहा था मैं सबक बनकर आया हूँ, तुम्हें आज से सिखाकर तुम्हारा कल बनाने आया हूँ, मगर कल की कल्पना मैं करूँ तो कैसे करूँ, जब तुमनें रात में मुझे सुबह के होने से डराया है, आज फिर मेरा अतीत मेरे सामनें आया है, मेरी दुखद स्मृतियों को अपनें संग लाया है। मैनें होश में भुलाया तो तुमनें ख्वाब में सताया है, मेरे कष्ट को तुमनें सदा ही बढ़ाया है, मेरी मासूमियत को तुमने अपनी हैरत से ललकारा है, अपनी फितरत से मुझे तुमने बेशक ही वाकिफ कराया है, आज फिर मेरा अतीत मेरे सामनें आया है, मेरी दुखद स्मृतियों को अपनें संग लाया हैं। ~लक्षिता उपाध्याय