On the occasion of International Women's Day
अब तुम सबल बनो। नारी, अब तुम सबल बनो, तुम हर चुनौती को अटल रहो, बिखेर न सके कोई तुम्हे, तुम मैदान-ए-जंग में प्रबल बनो, फूल सा स्वरूप तुम्हारा, खुद को चिंगारी से अवगत करो, औरों को तो बहुत किया, अब अपना निर्माण स्वंय करो, नारी, अब तुम सबल बनो। कोई दया करे तो मत अपनाओ, अगर घृणा करे तो मत घबराओ, दहलीज लाँघकर देखो संसार नजर आयेगा, जो आज करता तुम्हारी निंदा कल वो शर्मसार नजर आयेगा, मर्यादा की हर बंदिश को तुम खुद से पहले खत्म करो, नारी, अब तुम सबल बनो। तुम युद्ध में जीत कर आने के लिए काफी हो, तुम सहारे के नहीं बल्कि सराहने के काबिल हो, किसी दिवस की आवश्यकता नहीं तुम्हारी कद्र जताने को, तुम्हारा स्वरूप ही काफी है, तुम्हारा अस्तित्व बताने को, लोग क्या कहेंगे यह उन पर ही निर्भर करो, नारी,अब तुम सबल बनो। ~लक्षिता उपाध्याय